
राग मलकौंस एक गंभीर, ध्यान-युक्त और रात्री राग है जो सिर्फ पांच स्वर (पञ्चस्वर) पर आधारित होता है। यह गम्भीरता और मृदु भावों के लिये प्रसिद्ध है। यह ट्यूटोरियल कदम दर कदम बताएगा कि मलकौंस के मूल स्वर, चलन, प्रचलित प्रमुख वाक्य (पकड़), झपताल में बंदिश कैसे बनती और कैसे अभ्यास करनी चाहिए — साथ ही सामान्य गलतियों और अभ्यास योजनाओं के साथ।
विषय सूची
Step 1: 🎵 मलकौंस का परिचय — स्वर, समय और मूड
स्वर (Swar): मलकौंस पंचस्वर राग है। इसमें उपयोग के स्वर हैं:
सा (षड्ज) — शुद्ध
Komal Ga (गाँ — गा बेम़ोल)
Shuddh Ma (म — मध्यम)
Komal Dha (धा — धा बेम़ोल)
Komal Ni (नि — नि बेम़ोल)
नोट: राग में Re और Pa मौजूद नहीं होते।
समय: प्राचीन परंपरा के अनुसार मलकौंस को मध्यरात्रि के बाद का समय माना जाता है।
भाव (Rasa): गंभीर, ध्यानात्मक और स्थिर भाव; शान्त, अलौकिक और बिंबात्मक स्वर बनते हैं। तेज़-तर्रार तानों की अपेक्षा धीमे, विस्तारित फेरे और आंदोलनों से अधिक सूट करता है।
Step 2: 🎼 आरोहण-अवरोहण और प्रमुख व्याकरण
Arohana ( आरोह ): Sa komal Ga Ma komal Dha komal Ni Sa' — सामान्यतः इसे संक्षेप में लिखते हैं: S g M d n S'
Avarohana ( अवरोह ): S' n d M g S — संक्षेप: S' n d M g S
यह रूप केवल दिशा बताने के लिये है; राग की आत्मा मुख्यत: उसके चलन (chalan) और पकड़ (pakad) से आती है।
Important points
Vadi और Samvadi: Vadi = Ma, Samvadi = Sa। इसका अर्थ है Ma पर अधिक स्थायी ध्यान तथा Sa पर सहायक विश्राम।
Nyas (अवसान स्थान): सामान्यतः Nyas Sa और Ma पर किया जाता है। ये स्वर स्थायी विराम और सुर की इत्मीनान दिखाते हैं।
कोमल स्वर की संवेदनशीलता: Komal Ga, Komal Dha और Komal Ni को शुद्ध इंटोनेशन (shruti) के साथ गाया जाना चाहिए; थोड़ी सी असावधानी से राग का रूप बदल सकता है।
Step 3: 🎶 पकड़ (Pakad) और प्रचलित चलन — कैसे पहचानें राग
राग की पहचान के लिए कुछ लक्षणात्मक वाक्य (phrases) हैं जिन्हें सुनकर या गाकर मलकौंस पहचाना जा सकता है।
मुख्य पकड़ उदाहरण: M (->) g M d n S' — यानी Ma से नीचे जाकर Komal Ga पर हलकी औरोलन या Meend और फिर ऊपर वापसी।
खास मूवमेंट: Sa से नी के माध्यम से Ma पहुंचना, और Ma पर ठहराव — Ma का व्यापक प्रयोग राग का केंद्र बनाता है।
आवर्ती वाक्य: g M d n S' — ऊपर की ओर फ्लो; ऊपर से आने पर S' n d M g S — नीचे आने पर शुद्ध उतराव।
अन्य छोटे-छोटे वाक्य जैसे "Sa g M g Sa" या "M g M d n" अक्सर सुनने में आते हैं। इन वाक्यों का अभ्यास पकड़ को स्पष्ट करने में मदद करता है।
Step 4: 🎤 मात्रा और अलंकार — साधारण अभ्यास पैटर्न
राग की सामग्री को मजबूत करने के लिए कुछ अभ्यास (Alankar) और पैटर्न उपयोगी होते हैं। नीचे दिए गए अभ्यास धीरे-धीरे किया करें — पहले धीमी गति में, फिर मध्यम।
आलापिक आरोह-अवरोह: S — g — M — d — n — S' और वापसी S' — n — d — M — g — S। धीमी आवाज़ में हर स्वर पर स्थिर रहें।
मोड़ (phrases) अभ्यास:
- S g M g S ( छोटी मोड़ )
- g M d n S' ( ऊपर की ओर քայլ )
- S' n d M g S ( अवरोह का विस्तृत वाक्य )
S g M g S ( छोटी मोड़ )
g M d n S' ( ऊपर की ओर քայլ )
S' n d M g S ( अवरोह का विस्तृत वाक्य )
Meend और Andolan: Komal Ga और Komal Dha पर महीन andolan/आंदोलन का अभ्यास करें। इन स्वरों को हल्के से घुमाकर या Meend से जोड़कर गाना सबसे प्रभावी है।
गोलाकार मांडल (gamak-light): तेज़ Gamak को टालें; हल्की oscillation और स्लर वाले Gamak ठीक रहते हैं।
Step 5: 🪘 झपताल (10-ताल) — रचना और बंदिश बनाने का तरीका
झपताल संरचना: Jhaptal 10 मात्राओं का चक्र है, विभाजन सामान्यतः 2 + 3 + 2 + 3 के रूप में होता है। इस पर बंदिश बनाते समय हर पंक्ति को 10-ताल के अनुसार जोड़ना होता है।
प्रैक्टिकल तौर पर, जब आप धड़कन (laya) और ताल समझ लें, तो बंदिश को ताल के हर विभाग से जोड़कर गाना आसान होगा।
बंदिश लिखने के सामान्य चरण
बंदिश की लयबद्ध पंक्ति तैयार करें — 10-लय के हिसाब से शब्दों की मात्रा मिलाएं।
प्रत्येक शब्द या शब्द समूह को 10-ताल की 10 मात्राओं में विभाजित करें।
ध्यान रखें कि Sam (ताल का पहला मैट्रा) पर या सम के आसपास महत्व दिया जाता है; अक्सर बंदिश के क्लाइमेक्स या स्थायी स्वर सम पर आते हैं।
संगीत-वाक्य (mukhra और antara) में पकड़ और nyas की व्यवस्था रखें — Nyas अक्सर Sa या Ma पर किया जाता है।
उदाहरण: सरल झपताल बंदिश (सारगम सहित)
नीचे उदाहरण के तौर पर एक छोटी बंदिश दिखाई जा रही है। यह पूरी तरह मूल है और अभ्यास के उद्देश्य से है।
ताल: झपताल (10) विभाग: 2 | 3 | 2 | 3 शब्द रचना: "प्रभुदय, करुणा लाओ" (उदाहरण मात्र) मूक (Mukhra) — 10 मात्रा Sa g M | d n Sa | g M d | n Sa 1 2 3 | 4 5 6 | 7 8 9 | 10 सारगम नोटेशन (संक्षेप में): S g M d n S | g M d n S ऊपर का उदाहरण दिखाता है कि आप कैसे शब्दों/स्वरों को 10-ताल के 10-मैट्राओं में बाँट सकते हैं। वास्तविक बंदिश में शब्द संगीत के साथ मेल खाते हुए लिखे जाते हैं और ताल के क्लाइमेक्स (सम) पर इमोशन या स्थायी स्वर रखा जाता है।
Step 6: 🎯 बंदिश की रचना के व्यावहारिक नियम और उदाहरण
जब आप वास्तविक बंदिश बनाते हैं या सीखते हैं, तो ध्यान रखें:
मोड़ (Phrases) रागनिष्ठ हों: बंदिश में आने वाले सभी वाक्य राग की पकड़ से मेल खाएँ — Re और Pa का इस्तेमाल न करें।
Nyas और Sam: बंदिश में सम पर आम तौर पर स्थायी स्वर (Sa या Ma) रखें। यह श्रोताओं को ताल के साथ राग की स्थिर पहचान देता है।
लय व शब्दावली: शब्दों को ताल के छोटे हिस्सों में बांटें ताकि लय बाधित न हो।
अलंकारों का संयम: Meend और हल्के andolan का इस्तेमाल करें; भारी ornamentation बन्दिश की शुद्धता प्रभावित कर सकती है।
Step 7: 🧭 अभ्यास योजना — रोज़ाना क्या करें और किस क्रम में
न्यूक्लियर अभ्यास योजना और समय प्रबंधन से राग जल्दी बनता है। नीचे 60-90 मिनट के सत्र का उदाहरण दिया गया है जिसे आप अपनी सुविधा के अनुसार कम-ज़्यादा कर सकते हैं।
Shruti/Tanpura सेटअप (2-3 मिनट): सा की shruti मिलाएँ। मलकौंस में tanpura पर Ma और Sa का संतुलन अच्छा लगता है।
धीमा आलाप (15-25 मिनट): S — g — M — d — n — S' और वापसी पर विस्तृत अलाप। Ma पर ठहराव और Sa पर Nyas पर ध्यान।
पकड़ और phrases अभ्यास (15-20 मिनट): उपर बताये गए पकड वाक्यों को अलग-अलग गति में दोहराएँ। Meend और andolan का नियंत्रण करें।
सारगम और अलंकार (10-15 मिनट): सर्गम में सीढ़ियाँ, गितकार और छोटे-छोटे हलके तानों का अभ्यास करें, तेज़ी से नहीं बल्कि स्पष्टता से।
बंदिश पर काम (15-25 मिनट): झपताल में बंदिश गाएं। पहले शब्दों के साथ, फिर sargam के साथ। ताल पर सम की पहचान और nyas बनाये रखें।
ठंडा अभ्यास/रिकैप (5-10 मिनट): धीरे-धीरे स्वर नीचे लेकर साँसें नियंत्रित करके दिन के मुख्य बिंदु दोहराएँ।
Step 8: ⚠️ सामान्य गलतियाँ और उनसे बचने के तरीके
निम्नलिखित गलतियाँ अक्सर नए अभ्यासकों द्वारा की जाती हैं। इन्हें जानकर आप बच सकते हैं:
Re और Pa का उपयोग: मलकौंस में Re और Pa नहीं होते; अनजाने में इनका इस्तेमाल राग को बदल सकता है।
तुरन्त तेज़ तानें: तेज़ तानों से मधुरता और राग की गंभीरता गायब हो सकती है। मलकौंस धीमे और विस्तारित वाक्यों में ही खूबसूरत लगता है।
Komal स्वर का गलत pitch: Komal Ga/Dha/Ni को सही Shruti पर पकड़कें; थोड़ी सी चूक से स्वर कृष्ण हो सकता है।
Ma का कम उपयोग: Ma राग का मुख्य स्वर है; Ma पर ठहराव और emphasis आवश्यक है।
अत्यधिक ornamentation: भारी गमिक या तेजी से रोलिंग अलंकार राग के सूक्ष्मपन को छिपा देते हैं। हल्का और संवेदनशील ornamentation रखें।
Step 9: 🧩 विस्तृत अभ्यास उदाहरण — 4 सप्ताह का सिलेबस
निम्नलिखित चार सप्ताह का योजना शुरुआती से मध्यम स्तर तक पहुंचने में मदद कर सकता है। रोज़ाना 45-75 मिनट दें।
सप्ताह 1 — आधार और सुनना:
- दिन 1-3: अलाप में S g M d n S' और वापसी के साथ धीरे-धीरे वर्कआउट।
- दिन 4-7: पकड़ (pakad) के वाक्य और Ma-Sa पर Nyas का अभ्यास।
दिन 1-3: अलाप में S g M d n S' और वापसी के साथ धीरे-धीरे वर्कआउट।
दिन 4-7: पकड़ (pakad) के वाक्य और Ma-Sa पर Nyas का अभ्यास।
सप्ताह 2 — वाक्य और अलंकार:
- दिन 8-12: छोटे-छोटे अलंकार, meend, और हल्की andolan पर काम।
- दिन 13-14: राग के भाव के साथ धीमी बंदिश गाना।
दिन 8-12: छोटे-छोटे अलंकार, meend, और हल्की andolan पर काम।
दिन 13-14: राग के भाव के साथ धीमी बंदिश गाना।
सप्ताह 3 — ताल और बंदिश:
- दिन 15-18: Jhaptal की समझ, ताल व विभाजन।
- दिन 19-21: छोटी बंदिश बनाकर ताल के साथ गाना।
दिन 15-18: Jhaptal की समझ, ताल व विभाजन।
दिन 19-21: छोटी बंदिश बनाकर ताल के साथ गाना।
सप्ताह 4 — प्रस्तुति और सुधार:
- दिन 22-24: धीमे-तेज़ dynamics पर काम।
- दिन 25-28: पूरा रियाज़ सत्र — आलाप, बंदिश, और थोड़े तान (मर्यादा में)।
दिन 22-24: धीमे-तेज़ dynamics पर काम।
दिन 25-28: पूरा रियाज़ सत्र — आलाप, बंदिश, और थोड़े तान (मर्यादा में)।
Step 10: 🔍 व्यावहारिक सुझाव — अभ्यास के दौरान ध्यान में रखने योग्य बातें
Shruti की स्थिरता: हमेशा tanpura या shruti machine के साथ अभ्यास करें ताकि Komal swar स्पष्ट रहें।
धीमी शुरुआत: नई phrases और meend पहले बहुत धीरे सीखें। गति बाद में बढ़ाए।
रिकॉर्डिंग और सुनना: अपना अभ्यास रिकॉर्ड कर के सुनें; गलतintonation तुरंत पकड़ में आ जाती है।
अभ्यास भाग-दिनचर्या: सांस नियंत्रण के लिए प्राणायाम और हल्का vocal warm-up ज़रूरी है।
गुरु से प्रतिक्रिया: संभव हो तो बंदिश और पकड़ का feedback विशेषज्ञ से लें; गलत आदतें जल्दी बन जाती हैं।
Step 11: 🎧 सुनने के लिए क्या देखें — संदर्भ और अनुकरण
राग की समझ गहराने के लिए विभिन्न कलाकारों के aalap और bandhisho को सुनना उपयोगी है। सुनते समय ध्यान दें:
Ma और Sa पर कितनी बार Nyas लिया गया है।
Komal Ga/Dha/Ni पर कितना andolan या meend है।
ताल में कैसे शब्द और स्वरों का मेल होता है।
सुनने का मकसद तुलना नहीं, बल्कि अपने स्वर और फ़्रेज़िंग में सूक्ष्म सुधार करना होना चाहिए।
Step 12: 🧾 संक्षिप्त चेकलिस्ट — अभ्यास के पहले हर बार जाँचे
Tunings: Tanpura/ shruti ठीक है?
Tempo: क्या आज की practice धीमी से शुरू करें?
Target: आज का लक्ष्य क्या है — आलाप, पकड़ साफ़ करना, या बंदिश?
Recording: क्या रिकॉर्ड करने के लिए तैयार हैं?
Breath: लंबी/नियंत्रित साँसों का अभ्यास किया?
Step 13: 📌 निष्कर्ष और मुख्य बातें (Takeaway)
मलकौंस की आत्मा उसकी सादगी और गंभीरता में है। यह राग तेज़ प्रदर्शन की तुलना में धीमी, विस्तारित और भावनात्मक अभिव्यक्ति में उत्कृष्ट है। अभ्यास में:
Komal Ga/Dha/Ni की शुद्धता बनाए रखें।
Ma पर वाद्य या स्वरस्थिरता बनाये रखें।
Re और Pa का उपयोग न करें।
झपताल में बंदिश के लिए ताल विभाजन 2+3+2+3 ध्यान में रखें।
Step 14: ❓FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राग मलकौंस में कौन से स्वर प्रयोग होते हैं?
मलकौंस में पाँच स्वर होते हैं: Sa, Komal Ga, Shuddh Ma, Komal Dha और Komal Ni। Re और Pa का प्रयोग सामान्यतः नहीं होता।
मलकौंस का Vadi और Samvadi कौन से हैं?
Vadi (मुख्य स्वर) Ma है और Samvadi Sa है। इसलिए Ma पर अधिक emphasis और Sa पर न्यान्स (nyas) रखना लाभकारी होता है।
क्या मलकौंस में तेज़ तान उपयुक्त हैं?
सामान्यतः नहीं। मलकौंस धीमा, विस्तारित और भावात्मक रहता है। तेज़ तान राग की गंभीरता और संवेदनशीलता को कम कर सकते हैं। हल्के, नियंत्रित अलंकार अधिक उपयुक्त हैं।
झपताल कैसे गिनते हैं और इसे बंदिश में कैसे लागू करें?
झपताल 10 मात्राओं का चक्र है, विभाजन 2+3+2+3। बंदिश बनाते समय शब्दों को इन विभाजनों में बाँटना होता है ताकि प्रत्येक वाक्य ताल के अनुरूप हो। Sam यानी पहली मात्रा पर विशेष ध्यान रखें; बंदिश का आधिकांश सम के आसपास अथवा सम पर समाप्त होता है।
मलकौंस का अभ्यास कैसे शुरू करूँ?
Shruti/tanpura मिलाकर धीमा आलाप से शुरू करें। फिर पकड़ वाले वाक्यों का अभ्यास करें, Ma और Sa पर Nyas का अभ्यास करें। जब पकड़ स्थिर हो, तब झपताल में छोटी बंदिश से ताल का अभ्यास जोड़ें।
शुरुआती लिए सबसे बड़ी गलती क्या है?
राग में Re या Pa का उपयोग और Komal स्वर की गलत intonation सबसे आम गलतियाँ हैं। इसके अलावा तेज़-तेज़ तानों में राग की नाजुकता खोना भी सामान्य है।
Step 15: 📝 छोटा अभ्यास-कार्ड — हर दिन के लिए 10 मिनट (सारांश)
2 मिनट: Tanpura के साथ Sa की shruti मिलाना।
3 मिनट: S g M d n S' और वापसी धीमी आवाज़ में।
3 मिनट: Pakad वाक्य — S g M g S / g M d n S' दोहराना।
2 मिनट: Ma पर Nyas और एक लघु बंदिश का सम पर समाप्ति।
यह 10-मिनट कार्ड तब भी काम करेगा जब आपके पास पूरा अभ्यास सत्र न हो।
Step 16: 🧾 संदर्भ नोट्स और पड़ताल
रागीय परम्परा में कभी-कभी क्षेत्रीय या सीखने वाले की परंपरा के अनुसार कुछ सूक्ष्म अंतर होते हैं। यदि किसी गुरु या परंपरा में कोई अलग चलन बताया जाए (जैसे कुछ phrases की अलग emphasis), तो उसे समझकर उपयोग करें। परंतु मूल स्वर संरचना और मुख्य सिद्धांत (Komal Ga/Dha/Ni, Ma का वादीपन, Re/Pa का अभाव) अपरिवर्तनीय माने जाते हैं।
अंतिम टिप्पणी
मलकौंस सीखना धैर्य और सूक्ष्म श्रुति की मांग करता है। धीमे और सतत अभ्यास से आप राग के भाव और सुनहरे सुरों को आत्मसात कर पाएँगे। प्रतिदिन के छोटे, लक्षित अभ्यास और ताल के साथ काम करने पर यह राग बहुत जल्दी आपकी आवाज़ का एक विशेष हिस्सा बन जाएगा।
